बेंगलुरु में बैडमिंटन
© अजय डिसूजा
बैडमिंटन

अपने डबल्स बैडमिंटन खेल को बेहतर करने के छह टिप्स

टॉप डबल्स बैडमिंटन प्लेयर अश्विनी पोनप्पा, उनकी पार्टनर एन सिक्की रेड्डी और उनके कोच टेन किम हेर ने कुल छह ऐसे टिप्स दिए जिससे कोई भी डबल्स बैडमिंटन में बेहतर बन सकता है.
दीप्ति पटवर्धन (मूल अंग्रेजी से अनुवादित लेख) द्वारा लिखित
5 मिनट पढ़ेPublished on
अगर बैडमिंटन खेलना रॉक म्यूज़िक है तो समझ लीजिए डबल्स बैडमिंटन हेवी मेटल जैसा है.
बैडमिंटन कोर्ट में डबल्स खेलते हुए लगता है जैसे किसी ने उर्जा को बढ़ा दिया है और आप हर सेकेंड तेज होते जाते हैं, अस्त व्यस्त होते हैं, आपके दिल की धड़कन बढ़ जाती है. हर एक सेकेंड में आ रहे शटल का जवाब देना आपको बहुत ज्यादा व्यस्त कर देता है और ऐसा लगता है जैसे सांस लेने का भी समय नहीं है.
टेनिस और स्क्वैश जैसे रैकेट खेलों की तुलना में बैडमिंटन डबल्स, एक कला की तरह है. खिलाड़ियों को बहुत छोटी उम्र से ही तैयार किया जाता है ताकि वो डबल्स खेल पाएं. बैडमिंटन के किसी भी खिलाडी को सिंगल्स और डबल्स दोनों में शानदार खेलते हुए देखना बहुत ही दुर्लभ है.
भारत की प्रमुख डबल्स प्लेयर अश्विनी पोनप्पा ने बताया कि डबल्स बैडमिंटन गेम में मिक्स डबल्स प्लयेर नहीं खेलते है यानी महिला और पुरुष एक साथ नहीं खेलते. इन तीनों में ट्रेनिंग, रोटेशन और समझ का बहुत फर्क होता है.
अश्विनी पोनप्पा

अश्विनी पोनप्पा

© गौतम पी

टॉप डबल्स खिलाड़ी बनने के लिए किन चीज़ों की ज़रुरत है ये हमने पोनप्पा, एन सिक्की रेड्डी तथा इनके कोच टेन किम हेर से जाना.

डबल्स खेलते हुए मिलती है अलग ही खुशी

भारत में डबल्स खेलने को फॉल बैक पसंद माना जाता है लेकिन इसे दुनिया भर में सिंगल्स के बराबर का ही दर्जा दिया जाता है. खिलाड़ियों को 15 से 16 वर्ष की आयु में ही चुना जाता है और उन्हें डबल्स खेलने के लिए तैयार किया जाता है. भारत की डबल्स कोच टेन किम का यह मानना है कि अगर हमारे देश को ऑल राउंड बैडमिंटन पावरहाउस बनाना है तो सबसे पहले डबल्स और सिंगल्स बैडमिंटन को एक समान दर्जा और महत्व देना होगा.
मलेशिया के टेन जिन्हें डबल्स कोच के लिए 2016 में नियुक्त किया गया था उन्होंने कहा कि डबल्स भी एक अहम इवेंट है. लोगों को यह समझना होगा कि अगर आप डबल्स में कोई मेडल जीत कर आते हैं तो वो भी एक बड़ा पदक है. हमें इस मानसिकता को बदलना होगा. ऐसा हो इसलिए पेरेंट्स को, प्लेयर्स को और कोच को एक साथ बैठ कर चर्चा करनी होगी और छोटी उम्र से ही खिलाड़ियों को डबल्स खेलने के लिए ट्रेनिंग देनी होगी.
डबल्स बैडमिंटन को सिंगल्स के बराबर माना जाना चाहिए

डबल्स बैडमिंटन को सिंगल्स के बराबर माना जाना चाहिए

© नेविल सुखिया | रेड बुल कंटेंट पूल

अपनी कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना होगा

पूरे विश्व में यही प्रथा है कि कोच ही डबल्स खेलने वाले प्लेयर्स की जोड़ी बनाते हैं. इस प्रथा के खिलाफ जाते हुए भारत के प्लेयर्स जिनके साथ खुद को कम्फर्टेबल और जिसके साथ उनकी जोड़ी उनकी गेम को कोर्ट में सहज और बेहतर बनाएगी उसे चुनते हैं. खिलाड़ियों के बीच उनकी समझ पूरी तरह परिपक्व नहीं होती इसलिए कई बार वो सही साथी चुनने की स्थिति में नहीं हो सकते.
एन सिक्की रेड्डी ने कहा की हम भारत में यही सोचते हुए बड़े हुए हैं कि ‘मैं उसको पसंद नहीं करती, मैं उसके साथ नहीं खेलना चाहती’. कई बार माता पिता का बीच में आना भी इस बात का कारण रहा है. मगर मुझे लगता है गेम अच्छी हो इसलिए क्षमता को देखते हुए कोच को ही खिलाड़ियों की जोड़ी बनानी चाहिए.

सर्व और रिसीव करना

डबल्स में पहले दो शॉट खेलना बहुत ही अहम होता है. डबल्स का पूरा उद्देश्य होता है कि शटल को जितना हो सके नीचे रखा जाए. शॉट को हवा में ऊंचा खेलना एक तरीके से बहुत ही गलत है. डबल्स एक तेज तर्रार खेल है, इसमें सर्व और रिटर्न की नियुक्ति तुरंत तय करती है कि आपकी टीम प्वाइंट जीतेगी या नहीं. आप जितनी तेजी से अपने प्रतिद्वंद्वी को कमजोर शॉट खेलने के लिए मजबूर करते है उतना ही आप उसपर हमला करने और जीतने की अपनी संभावना को बढ़ा लेते हैं.
2017 में ज्वाला गुट्टा ने कहा था कि “मैं सर्व और रिटर्न करने में बहुत अच्छी थी. अगर आप मेरे सारे मैच को देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि मैं यह सुनिश्चित करती थी कि मैं ही खेल को खत्म करूं. मैं अपने पार्टनर के स्मैश या उसके प्लेसमेंट का फायदा उठाती थी, या मैं खुद को ऐसे प्लेस करती थी कि मेरे पार्टनर को उससे फायदा हो.”
डबल्स कोच अक्षय देवलकर के अनुसार युवाओं के पहले तीन स्ट्रोक उनकी ट्रेनिंग का बड़ा हिस्सा बनते हैं, कैसे सर्व करें, कहां जाएं, शटल कहां खेलें यह बहुत ही महत्वपूर्ण है.
कोर्ट पर अपनी पोजीशन पर ध्यान दें

कोर्ट पर अपनी पोजीशन पर ध्यान दें

© नेविल सुखिया | रेड बुल कंटेंट पूल

विश्वास और समझ बहुत जरूरी है

खुद पर भरोसा करें, साथ ही अपने साथी पर भरोसा करें. किसी भी जोड़ी के लिए यही मूल है.
डबल्स की गेम में दोनों ही खिलाड़ियों को उनकी जिम्मेदारी का पूरे तरीके से पता होता है. जब प्लेयर अटैक करने के लिए स्मैश या प्वाइंट खत्म करने के लिए बीच में अटक जाता है तब रक्षा करने वाले प्लेयर को रैली की गति और पैटर्न को नियंत्रित करने के लिए नेट पर रहना होता है.
अपना काम करें और साथ ही अपने पार्टनर पर भरोसा करें और उसे अपना काम करने दें.
पोनप्पा ने कहा कि आप अपने खेल और अपनी पार्टनरशिप को बेहतर करने पर ध्यान दें. ‘इस बात पर ध्यान न दें कि आपका साथी क्या नहीं कर सकता बल्कि उसकी सकारात्मक बातों पर ध्यान दें. टॉप डबल्स प्लेयर्स को देखें और उनसे सीखें. यह समझें कि आप किस तरह का खेल खेलना पसंद करते हैं और आपका साथी किस तरह खेलना पसंद करता है. आप किसमें मजबूत है? डबल्स को समझना बहुत ही ज़रुरी है. डबल्स के अभ्यास और तकनीक के बारे में आपको ऑनलाइन भी बहुत सारी जानकारी मिल सकती है. अगर आपके पास डबल्स के स्पेशल कोच नहीं हैं तो कोई बात नहीं आप अपने कोच के साथ बैठें और कुछ वीडियू देखें कि आप अपने डबल्स खेल को किस अभ्यास से बेहतर बना सकते हैं.

चाल के पीछे की सोच को समझना महत्वपूर्ण है

बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन का कोचिंग मैनुअल खेल के लिए एक पूर्व आवश्यकता के रुप में ओपन स्किल्स की बात करता है. इस ओपन स्किल का अर्थ है - अपने प्रतिद्वंद्वी के स्ट्रोक द्वारा प्रस्तुत विभिन्न चुनौतियों के अनुकूल होने में सक्षम होना. खेलने के पैटर्न, ताकत और कमजोरियों को जल्दी से समझने की यह क्षमता डबल्स में निर्णायक होती है क्योंकि यह खिलाड़ियों को थोड़ा सांस लेने की जगह देती है. इसके इलावा भी डबल्स खेल शक्ति और ताकत का खेल है, एक दुबले, पुष्ट पूर्वी एशियाई शरीर वाले के लिए यह अधिक अनुकूल होता है. यही वजह है कि अधिक कुशल विरोधियों के खिलाफ खेलते समय यूरोपीय और भारतीय खिलाड़ी अक्सर मूवमेंट और रणनीति पर भरोसा करते हैं.
पोनप्पा ने कहा कि हम कोर्ट में चतुर होते हैं, ताकत और गति इस खेल में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और बहुत सारे खिलाड़ियों में यही कमी है जिससे एशिया के खिलाड़ियों से मेल खाना मुश्किल हो जाता है. यूरोपीय रणनीति के हिसाब से बहुत अच्छा खेलते हैं, वे स्मार्ट होते हैं और अपने फायदे के लिए खेलते हैं.
आपके प्रतिद्वंद्वी की चालों के आधार पर रणनीति गेम जीतने में मदद कर सकती है

आपके प्रतिद्वंद्वी की चालों के आधार पर रणनीति गेम जीतने में मदद कर सकती है

© नेविल सुखिया | रेड बुल कंटेंट पूल

अपने श्रम से प्यार करें

ट्रेनिंग और टैक्टिकस महत्वपूर्ण होते हैं जो आपको एक अच्छा डबल्स प्लेयर बनाने में मददगार साबित होते हैं मगर पूर्ण समर्पण के बिना कोई भी टिक नहीं सकता. आपको अनुशासित और मेहनती होना होगा, परिणाम प्राप्त करने के लिए खुद को कड़ी ट्रेनिंग से गुजारना होगा. यह फिर चाहे कितना ही लंबा क्यों ना हो.
सिक्की रेड्डी ने कहा लंबी रैलियों की तैयारी करें, धैर्य रखें और मानसिक रुप से मजबूत रहें. अपने खेल और कड़ी मेहनत से प्यार करें और चाहे कुछ भी हो खुद पर विश्वास जरूर करें.