विश्व क्रिकेट के टॉप 5 स्विंग मास्टर्स
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विश्व क्रिकेट में टॉप 5 स्विंग मास्टर्स!

जब संदेह हो, तो दोनों तरफ स्विंग कराएं.
रेड बुल स्टाफ ((मूल अंग्रेजी से अनुवादित लेख)) द्वारा लिखित
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स्विंग बॉलिंग क्रिकेट के इतिहास की ऐसी कलाओं में से एक है जिसे बयां करना मुश्किल है. गेंद को हवा में घुमाना और बल्लेबाज़ों को परेशान करना खेल के सुखद दृश्य में से एक है.
क्रिकेट की पिच पर इस कला को करने वाले कई महान गेंदबाज़ आए, जिन्होंने अपने कौशल से ना सिर्फ दर्शकों के पसंदीदा बने बल्कि अपनी-अपनी टीमों का गौरव भी बढ़ाया. अब स्विंग में पारंपरिक स्विंग और रिवर्स स्विंग दोनों शामिल हैं, जहां गेंद अपनी चमक के विपरीत दिशा में स्विंग करती है. दोनों कलाओं के उस्ताद रहे हैं और कुछ बड़े नाम जो दिमाग में आते हैं उनमें एलेक बेडसर, वकार यूनिस, मैल्कम मार्शल और इमरान खान शामिल हैं.
आज विश्व क्रिकेट में इस कला के पांच सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों पर नज़र डालते हैं.

5. कगिसो रबाडा

दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेटर कगिसो रबाडा की एक प्रेस तस्वीर.

कगीसो रबाडा

© क्रेग कोल्स्की / रेड बुल कंटेंट पूल

कगिसो रबाडा विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों में से एक के रूप में उनकी प्रतिभा नवंबर 2015 में भारत के खिलाफ उनके पहले मैच में पहले ही उजागर हो चुकी थी. 2014 अंडर -19 क्रिकेट विश्व कप में 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पहली बार देखे जाने के बाद से, उनके करियर ने ऊंचाइया छूईं हैं. उनकी कामयाबी का सबसे बड़ा कारण उनकी गेंजबाज़ी में हर गेंद में कुछ अलग करना शामिल है. उनके यॉर्कर से विकेट मिलना लगभग तय माना जाता है और यॉर्कर गेंदबाज़ी में उनकी निरंतरता भी प्रशंसा के लायक है. रबाडा सटीक गति से कटर भी डाल सकते हैं, जिससे वह नई गेंद से खेल की शुरुआत करने के लिए पसंदीदा बन जाते हैं.

4. मिचेल स्टार्क

पिंक बॉल के साथ ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क

पिंक बॉल के साथ ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क

© कूकाबुरा

मिचेल स्टार्क बेहद ही तेज गति और स्विंग के साथ अपनी गेंदों से बल्लेबाज़ों को परेशान करने वाले खतरनाक गेंदबाज़ हैं. 16 साल की उम्र में वह 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाज़ी कर रहे थे. इसमें कोई संदेह नहीं था कि कम उम्र में ही उनकी क्षमता नजर आ रही थी और उनका करियर भी उम्मीदों के अनुसार ही आगे भी बढ़ा. स्टार्क गति में बदलाव और वेरिएशन करने के लिए भी जाने जाते हैं, और बल्लेबाज़ों को उनकी गेंदों को खेलने में सतर्कता अपनी पड़ती है. इसके अलावा जब घातक स्विंग का भी साथ हो, तो बाएं हाथ का यह गेंदबाज़ इस कला में सर्वश्रेष्ठ में से एक बनता है.

3. भुवनेश्वर कुमार

2008-09 के रणजी ट्रॉफी सीज़न में सचिन तेंदुलकर को शून्य पर आउट करने के बाद भुवनेश्वर कुमार ने सुर्खियां बटोरी थी. इसके बाद से उन्होंने अपने करियर में पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2012 में एक मजबूत पाकिस्तानी लाइन-अप के खिलाफ डेब्यू में उन्होंने प्रभावशाली ढंग से स्विंग गेंदबाजी करके अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. भारत में तेज गेंदबाज़ों की कमी के दौरान भुवनेश्वर सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए. वह अपनी खतरनाक इनस्विंग गेंदबाज़ी के लिए प्रसिद्ध हैं जो मैचों के टेल-एंड में कहर ढाती है. डेथ ओवरों में भी कहर बरपाने में वे पीछे नहीं हटते और उनकी स्लो डिलीवरी भी बल्लेबाज़ों को परेशान करती है. यह भी नहीं भूलना चाहिए कि टेस्ट मैच की शुरुआत में चमकदार गेंद से काफी स्विंग कराने की काबिलियत रखते हैं.

2. जेम्स एंडरसन

जेम्स एंडरसन पिछले एक दशक में इंग्लैंड के लिए टॉप गेंदबाज़ रहे हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनके कारनामे इंग्लैंड की सफलता की कुंजी रहे हैं, चाहे वह एशेज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्रदर्शन हो, या 2012 में भारत को हराकर आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 स्थान पर पहुंचना हो. एंडरसन में गेंद को स्विंग कराने या बल्लेबाज़ से अच्छी गति से गेंद को दूर ले जाने की क्षमता है. विपक्षी पारी की शुरुआत में उनके विकेट लेने की क्षमता अक्सर पिछले कुछ वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड की सफलता की कुंजी रही है. यहां तक कि तेज गेंदबाज़ों को कम मदद पहुंचाने वाले भारतीय ट्रैक्स पर भी, वह इंग्लैंड के लिए एक महत्वपूर्ण गेंदबाज थे और कई दशकों के बाद इंग्लैंड की पहली जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

1. डेल स्टेन

डेल स्टेन बिना किसी शक के पिछले सात-आठ सालों से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज़ रहे हैं. उनका हर टेस्ट मैच में औसत पांच विकेट से अधिक है और टेस्ट क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे बड़े मैच विजेता रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत गेंद को तेज गति से स्विंग कराने की उनकी क्षमता है. उनकी आउटस्विंग ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों को परेशान किया है. स्टेन गेंद को हवा में देर से घुमाने में माहिर हैं, और इससे बल्लेबाज़ को गेंद को खेलने के लिए एडजस्ट करने में बहुत कम समय मिलता है. जब स्टेन फॉर्म में होते हैं तो विश्व क्रिकेट में ऐसे कम ही नजारे देखने को मिलते हैं जहां उनकी तेज गेंदबाज़ी के दौरान बल्लेबाज़ असहाय नजर आते है. उनकी सफलता टेस्ट क्रिकेट में तेज स्विंग गेंदबाज़ी की प्रभावशीलता का प्रमाण है.