जब जोशुआ आजी मैथ्यूज़ और रोहन सिंह का उभरता फुटबॉल करियर थम गया, उन्होंने अपनी फिटनेस को बेहतर बनाने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश शुरू की. जहां जोशुआ ने जिम के रुटीन को अपनाया, वहीं रोहन ने एक क्रू के साथ डांसिंग शुरू की. उन्होंने कुछ अरसे तक इसे जारी रखा, लेकिन उनकी ज़िंदगी में तब सबकुछ बदल गया जब उन्हें कैलिस्थेनिक्स के बारे में पता चला.
जोशुआ को गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को खत्म करने वाले ह्युमन फ्लैग जैसे मूव्स ने आकर्षित किया, लेकिन पहली बार करने पर उन्हें पता चला कि ये कितना मुश्किल है. रोहन ने कुछ दिनों तक एक पब्लिक पार्क में कैलिस्थेनिक्स किया जिससे यंत्रों के साथ बंद जगह पर ट्रेनिंग करने की उनकी एकरसता खत्म हो गई.
कुछ वक्त के बाद, दोनों ने महसूस किया कि फ्रीस्टाइल कैलिस्थेनिक्स से उन्हें सिर्फ अपने गोल्स को ही हासिल करने में मदद नहीं मिली है, बल्कि उन्हें शक्ति और लचीलापन बढ़ाने के साथ रचनात्मक होने का भी मौका मिला है.
कुछ और एथलीट्स भी कैलिस्थेनिक्स की तारीफ करते रहे हैं. इसने निष्कर्ष अरोड़ा की मांसपेशियों को मज़बूत बनाया लेकिन इसके लिए उन्हें स्लैकलाइनिंग और रॉक क्लाइंबिंग के लिए आवश्यक गतिशीलता को खत्म करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. प्रोफेशनल बॉडीबिल्डर बिक्रम साहू के लिए कैलिस्थेनिक्स उनके वेट ट्रेनिंग का पूरक बन चुका है. और रंजन शर्मा के लिए इसने जिम के लिमिटेशन को खत्म कर दिया है.
वे इसकी व्याख्या करते हैं, कैलिस्थेनिक्स के पीछे का मुख्य विचार है शरीर के वजन और गुरूत्व शक्ति को जोड़कर ट्रेनिंग के लिए ज़रूरी एक प्रतिरोध तैयार करना. और जब इस ट्रेनिंग का फोकस पैरों पर होता है तो ये टेस्टोस्टेरोन पैदा करता है जिससे मांसपेशी बनती है और चर्बी कम होती है जिससे आपकी शरीर को और ताकत मिलती है और इंजरी का खतरा कम हो जाता है.
इन एथलीट्स ने कैलिस्थेनिक्स के पैरों के कुछ व्यायाम के बारे में नीचे बताया है जो उनके लिए काफी प्रभावी रहे.
बिक्रम साहू
फ्री स्क्वाट्स: आपके पैर थोड़े फैले और सीधे हों, अपने घुटने को मोड़ें और कूल्हे को पीछे की ओर झुकाकर बैठने की मुद्रा में जाएं. इसी वक्त, अपनी बाहों को आगे की ओर फैलाएं. तय करें कि आपकी एड़ियां ज़मीन से सटी हुई हो. फिर से खड़े हों और अपनी बाहों को नीचे लाएं. फ्री स्क्वॉट्स मुख्य रूप से आपके क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और ग्लूट्स पर काम करता है. इसे करने के दौरान आपके कोर स्ट्रेंथ, टखने की गतिशीलता, पीठ की मांसपेशियों और पिंडलियों का महत्वपूर्ण रोल होता है.
पिस्टल स्क्वाट्स: दोनों पैरों को जोड़कर खड़े हों. अपने बाएं पैर को तब तक आगे फैलाएं जब तक ये सीधा न हो जाए, पैर की एड़ी फर्श से थोड़ी ऊपर होनी चाहिए. अपनी बाहों को सामने उठाएं. अपने कोर को टाइट और रीढ़ की हड्डी को सीधी रखें. अब अपने दाहिने घुटने को मोड़ें और शरीर के निचले हिस्से को नीचे करने के साथ अपने बाएं पैर को फैलाते रहें, फिर खड़ी अवस्था में लौट जाएं.
जोशुआ आजी मैथ्यूज़
बॉक्स जंप्स: एक ऐसा बॉक्स लाएं जो आपके लिए सुविधाजनक हो. इसे खुद से दो फीट से कम की दूरी पर रखें. अपनी बाहों को लय में आगे-पीछे घुमाएं, साथ में ग्राउंड पर कूदते रहें. अपने घुटनों को मोड़कर बॉक्स पर कूदें, फिर सीधे होकर एक पैर पर बॉक्स से नीचे उतरें. यह एक पॉलिमेट्रिक एक्सरसाइज़ है जिससे आपके ग्लूट्स, क्वॉर्डिसेप्स, पिंडलियों और हैमस्ट्रिंग को ताकत मिलेगी. इससे आपकी गति बढ़ेगी, साथ ही हार्ट रेट बढ़ने से कैलोरी भी जलेगी.
स्पैनिश स्क्वाट्स: इस एक्सरसाइज़ के लिए आपको एक प्रतिरोधी बैंड की ज़रूरत होगी. इसे एक जगह बांध दें और पैरों के लिए इसके दो लूप्स तैयार करें. इन लूप्स को अपने घुटने से ठीक नीचे सेट करें. तब तक पीछे हटें जब तक आप बैंड में तनाव महसूस न करें. अब घुटने को मोड़ने के साथ अपने कूल्हे को पीछे की तरफ झुकाएं. अपने हिप्स को तब तक झुकाएं जब तक लगभग 90 डिग्री का कोण न बन जाए, फिर धीरे से खड़ी अवस्था में लौट जाएं. स्पैनिश स्क्वॉट्स से आपका क्वॉड्रिसेप्स बहुत मज़बूत बनता है और घुटनों में चोट की आशंका भी नहीं रहती.
रोहन सिंह
लंजेज़: अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को सीधा रखें. एक कदम आगे रखते हुए अपने कूल्हे को तब तक नीचे करें जब तक दोनों घुटने 90 डिग्री पर न मुड़ जाएं. इस दौरान आपके पैर का घुटना टखने की सीध में होना चाहिए. घुटना फर्श में नहीं सटना चाहिए. अब अपने वजन को एड़ी पर छोड़ दें और फिर से शुरुआती पोजिशन के लिए सीधे हो जाएं. इसे दोहराएं. इससे आपकी पीठ का निचला हिस्सा, हिप्स, ग्लूट्स और क्वॉड्रिसेप्स में शक्ति आएगी.
साइड स्क्वाट्स: अपने पैरों को हिप्स से थोड़ा ज़्यादा फैलाकर रखे. हाथों को अपने सामने फैलाएं. अपने वजन को दाहिनी एड़ी पर रखें, हिप्स को पीछे की तरफ धक्का दें और दाहिने घुटने को मोड़ें. तय करें कि आपका बायां पैर सीधा रहे. इसे दोहराएं, इस बार वजन को बाईं एड़ी पर रखें, बाएं घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को फैलाएं. इसकी मुश्किल को बढ़ाने के लिए टखने पर प्रतिरोधी बैंड और वजन का इस्तेमाल कर सकते हैं. साइड स्क्वॉट्स आपके ग्लूट्स और क्वॉड्रिसेप्स पर काम करते हैं.
रंजन शर्मा
ग्लूट ब्रिजेज़: अपनी पीठ के बल लेट जाएं. अपने पैरों को सीधा रखकर घुटनों को मोड़ें. अपने कोर का इस्तेमाल करके अपने हिप्स को उठाएं. अपने हाथों को किनारे में सीधा रखें. इस आसन में एक सेकेंड के लिए रहें और शुरुआती पोजिशन में लौट जाएं. ग्लूट ब्रिजेज़ आपके हिप्स और कोर मसल्स पर काम करते हैं.
सिस्सी स्क्वाट्स: ये नॉर्मल स्क्वाट्स से अलग है. अपने पैरों को सीधा रखकर अपने घुटनों को आगे की ओर धक्का दें, अपनी एड़ियों को उठाकर पीछे की ओर मोड़ें. अपका शरीर सिर से एड़ी तक सीधा रहना चाहिए. अपने घुटनों को जहां तक संभव हो नीचे ले जाएं और खड़ी अवस्था में वापस लौट जाएं. घुटने की समस्या वालों को यह व्यायाम नहीं करने की सलाह दी जाती है.
निष्कर्ष अरोड़ा
चेयर होल्ड अगेंस्ट वॉल: पीठ को दीवार के सहारे सीधी रखें, एक कदम आगे बढ़ाकर घुटने को मोड़ें और बैठने की अवस्था में पहुंच जाएं, आपकी जांघें फर्श के समानांतर होनी चाहिए. जब तक संभव हो इस पोजीशन में रहें. यह आइसोमेट्रिक ट्रेनिंग का एक प्रकार है जो क्वॉड्रिस्पेस के लिए अच्छा होता है.
काफ रेजेज़: दोनों पैरों को फर्श पर फ्लैट और पीठ को सीधी रखें, वजन को अपने पैरों के बॉल्स पर शिफ्ट करें फिर एड़ियों को उठाएं. थोड़ी देर तक ऐसे रहने के बाद शुरुआती पोजीशन में लौट जाएं. आप हाथ में वजन रखकर इसकी मुश्किल को बढ़ा सकते हैं.